एक स्टेबलकॉइन जो कभी स्थिर नहीं रहा
इन्हीं में से एक था World Liberty Financial Stablecoin (USDL), जिसे सुरक्षित निवेश के तौर पर पेश किया गया था। इसे डॉलर के बराबर होने का दावा किया गया, ताकि निवेशकों को स्थिरता मिल सके। मगर हकीकत कुछ और ही थी। रिपोर्ट बताती है कि कई निवेशकों के हाथ खाली रह गए। Public Citizen का कहना है कि "सभी को भारी नुकसान नहीं हुआ," लेकिन नुकसान इतना बड़ा है कि इसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। सबसे बुरी बात यह थी कि इस पूरे प्रोजेक्ट का ढांचा ही झूठे वादों और पारदर्शिता की कमी पर टिका था – जैसे किसी कार्ड हाउस की तरह।
संदिग्ध डीलों का जाल
World Liberty Financial तो बस एक उदाहरण है। ट्रम्प और उनके साथियों ने पिछले कुछ सालों में कई ऐसे क्रिप्टो प्रोजेक्ट्स लॉन्च किए हैं, जो जुआघर से ज्यादा भरोसेमंद निवेश लगते हैं। उदाहरण के लिए, TrumpCoin (TRUMP) – 2018 में आया एक मेमेकॉइन, जो "HODL" कहने से पहले ही डूब गया। या फिर DJT टोकन, जिसे 2024 में उनके राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार बनने के संदर्भ में पेश किया गया था। मगर जैसे ही उत्साह खत्म हुआ, यह टोकन सीसे की तरह गिर गया।
और फिर था TriumphX – एक क्रिप्टो एक्सचेंज प्रोजेक्ट, जिसे बाजार में हेरफेर और दिवालिया होने के आरोपों के चलते बेपरवाही से बंद कर दिया गया। पैटर्न साफ है: ट्रम्प अपने नाम और प्रसिद्धि का इस्तेमाल तब किया जब उन्हें ठोस और विनियमित फाइनेंशियल उत्पादों की जरूरत थी। यहां तो सामान्य बुद्धि ही गायब नजर आ रही है!
Public Citizen मांग कर रहा है सख्त कार्रवाई – और बिल्कुल सही है
Public Citizen जैसे उपभोक्ता संरक्षण संगठन अब ट्रम्प और उनके साथियों पर आरोप लगा रहे हैं कि उन्होंने निवेशकों को व्यवस्थित रूप से गुमराह क
िया – झूठे रिटर्न और सुरक्षा के झूठे वादों के जरिए। सबसे खतरनाक बात यह है कि अमेरिका में नियामक निगरानी की कमी ने ऐसे प्रोजेक्ट्स को फलने-फूलने का मौका दिया।
Public Citizen के एक प्रवक्ता का कहना है, "डोनाल्ड ट्रम्प ने एक बिजनेसमैन के तौर पर नाम कमाया है – मगर उनके निवेशकों के लिए नहीं।" और सच कहा जाए तो इसमें कोई बहस नहीं हो सकती। उनके क्रिप्टो प्रोजेक्ट्स गैर-पारदर्शी, बहुत जोखिम भरे रहे हैं और निवेशकों को अरबों का नुकसान हुआ है। सवाल उठता है: आखिर किसने किसको धोखा दिया?
लोग बार-बार ऐसे स्कीमों का शिकार क्यों होते हैं?
इसके पीछे मनोविज्ञान बहुत साफ है – और साथ ही डरावना भी। पहला, हेलो इफेक्ट (Halo Effect): ट्रम्प सफलता का पर्याय हैं, इसलिए लोग बिना जांचे-परखे उनके प्रोजेक्ट्स पर भरोसा कर लेते हैं। दूसरा, FOMO (फियर ऑफ मिसिंग आउट): क्रिप्टो मार्केट्स में तेजी-गिरावट के दौर में लोग जल्द से जल्द पैसा कमाने की चाह में जोखिम उठाते हैं, जो वे सामान्य तौर पर नहीं करते। तीसरा, वित्तीय शिक्षा की कमी: कई निवेशकों को क्रिप्टो की जटिलताओं की समझ नहीं होती। वे तथ्यों की बजाय हाइप, नाम और जल्दी दौलत कमाने की उम्मीद पर दांव लगाते हैं। और अंत में? उनके हाथ खाली पदार्थ रह जाते हैं।
क्या अब SEC सख्ती बरतने को तैयार है?
बढ़ती आलोचना को देखते हुए अमेरिकी प्रतिभूति एवं विनिमय आयोग (SEC) पर प्रभावशाली हस्तियों द्वारा प्रमोट किए जाने वाले क्रिप्टो प्रोजेक्ट्स के लिए सख्त नियम बनाने का दबाव बढ़ रहा है। SEC पहले ही इन्फ्लुएंसर-पंप-एंड-डंप स्कीम्स (जहां सेलेब्रिटीज जैसे किम कार्दशियन गैर-कानूनी क्रिप्टो प्रोजेक्ट्स को प्रमोट करते हैं) पर कार्रवाई कर चुका है।
ट्रम्प के लिए इसका मतलब यह हो सकता है कि उनके आगामी प्रोजेक्ट्स की कड़ी निगरानी होगी – या फिर वे पूरी तरह क्रिप्टो बिजनेस से बाहर निकल जाएं। मगर सवाल यह है: क्या आप इस पर दांव लगाएंगे?
सभी क्रिप्टो निवेशकों के लिए एक चेतावनी
ट्रम्प के क्रिप्टो प्रोजेक्ट्स की कहानी सभी निवेशकों के लिए एक सीख है। हर प्रभावशाली व्यक्ति जो किसी फाइनेंशियल प्रोडक्ट को प्रमोट करता है, आपके हितों पर ध्यान नहीं दे रहा। जो लोग बिना सोच
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